विकासखंड शमशाबाद के अंतर्गत ग्राम ऊगरपुर के प्राथमिक विद्यालय प्रथम को दूसरे विद्यालय में विलय करने की प्रस्ताव के विरोध में ग्रामीण और अभिभावकों में मोर्चा खोल दिया है विद्यालय में 52 छात्र छात्राएं नामांकित में जो नियमित रूप से अध्यनरत हैं।
उसके बावजूद जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय द्वारा इस समीप भारती विद्यालय में मार्च करने की संस्कृति कर दी गई है। ग्रामीणों की ओर से यह कहा जा रहा है कि प्रस्ताव भेजे की प्रक्रिया में स्थानीय सहभागिता नहीं ली गई।
केवल पांच अभिभावकों के हस्ताक्षर के आधार पर ही प्रस्ताव भेज दिया गया जबकि नियमानुसार ग्राम पंचायत विद्यालय प्रबंधन समिति और समस्त अभिभावकों की सहमति जरूरी है।
ग्रामीणों का कहना है कि मर्ज किए गए विद्यालय एक किलोमीटर से अधिक दूर है और मार्ग में बंदरों के झुंड जैसे कई प्राकृतिक अवरोध हैं, जिससे छोटे बच्चों के लिए रोजाना स्कूल जाना जोखिम भरा होगा। छह से दस वर्ष की उम्र वाले बच्चों को इतनी दूरी तय कर स्कूल भेजना व्यवहारिक नहीं है। इससे बालिका शिक्षा पर भी नकारात्मक असर पड़ सकता है।
ग्रामवासियों ने ज्ञापन के माध्यम से जिलाधिकारी से मांग की है कि मर्जर की संस्तुति को तत्काल निरस्त किया जाए और विद्यालय को पूर्ववत संचालित रहने दिया जाए। साथ ही उन्होंने यह चेतावनी भी दी है कि यदि उनकी मांग नहीं मानी गई तो वे विद्यालय बंदी के विरोध में आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।

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