पात्रता परीक्षा (TET) को लेकर देशभर के शिक्षकों में बढ़ती चिंता के बीच कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं राज्यसभा सांसद प्रमोद तिवारी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर इस पर पुनर्विचार की मांग की है। उन्होंने कहा है कि TET लागू होने से शिक्षा जगत में एक गंभीर संकट उत्पन्न हो जाएगा, जिसका असर न केवल लगभग 25 लाख शिक्षकों और उनके परिवारों पर पड़ेगा, बल्कि देश के करोड़ों छात्रों और उनके अभिभावकों को भी इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ेगी।
सांसद प्रमोद तिवारी ने पत्र में उल्लेख किया है कि उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षक संघ द्वारा भेजे गए संलग्न अनुरोध पत्र का गंभीरता से अवलोकन किया जाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में शिक्षक समुदाय में निराशा, हताशा और असंतोष की भावना व्याप्त है, जिसे दूर करने के लिए प्रधानमंत्री स्तर से हस्तक्षेप अत्यंत जरूरी है।
उन्होंने यह भी कहा कि समाज को दिशा देने और भविष्य के भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले शिक्षकों के साथ जो अन्याय हो रहा है, उसे न्याय में बदलना समय की मांग है। TET को पूर्व से कार्यरत शिक्षकों पर जिस प्रकार लागू किया जा रहा है, उससे संबंधित आदेश को निरस्त करने के लिए केंद्र सरकार को स्पष्ट और उचित निर्देश जारी करने चाहिए।
सांसद ने प्रधानमंत्री से आग्रह किया है कि इस संवेदनशील मामले में तत्काल हस्तक्षेप कर शिक्षकों के हितों की रक्षा सुनिश्चित की जाए, ताकि शिक्षा व्यवस्था और देश के भविष्य पर कोई नकारात्मक प्रभाव न पड़े।

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