लखनऊ। उत्तर प्रदेश में अप्रैल 2025 में आयोजित असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती परीक्षा को राज्य सरकार ने रद्द कर दिया है। प्रश्नपत्र लीक होने की पुष्टि होने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोपनीय जांच कराई, जिसमें गंभीर अनियमितताएं सामने आईं। साक्ष्य मिलने पर परीक्षा निरस्त करने और दोबारा आयोजन के निर्देश दिए गए हैं।
यह परीक्षा उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग द्वारा 910 पदों पर भर्ती के लिए कराई गई थी, जिसमें कुल 82,876 अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था। जांच में खुलासा हुआ कि मॉडरेशन प्रक्रिया के दौरान ही अलग-अलग विषयों के प्रश्नपत्र बाहर निकाल लिए गए थे, जिन्हें बाद में अभ्यर्थियों तक पहुंचाया गया।
STF जांच में बड़े खुलासे
एसटीएफ की जांच में तत्कालीन आयोग अध्यक्ष के गोपनीय सहायक महबूब अली, सहायक प्रोफेसर बैजनाथ पाल और उसके भाई विनय कुमार की संलिप्तता सामने आई। आरोप है कि प्रश्नपत्र लाखों रुपये में बेचे गए। तीनों को गिरफ्तार कर लिया गया है। मोबाइल डेटा और डिजिटल साक्ष्यों के मिलान से परीक्षा की पारदर्शिता भंग होने की पुष्टि हुई।
अध्यक्ष का इस्तीफा भी आया सामने
मामले के बढ़ने पर तत्कालीन आयोग अध्यक्ष प्रो. कीर्ति पांडेय ने पद से इस्तीफा दे दिया था, जिसे बाद में स्वीकार कर लिया गया। परीक्षा परिणाम जारी होने के बाद से ही अभ्यर्थियों द्वारा पारदर्शिता पर सवाल उठाए जा रहे थे।
जल्द होगी दोबारा परीक्षा
मुख्यमंत्री ने आयोग को निर्देश दिए हैं कि असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती परीक्षा का आयोजन जल्द, पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से किया जाए, ताकि योग्य अभ्यर्थियों को न्याय मिल सके।

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