लखनऊ। उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग के अध्यक्ष डॉ. प्रशांत कुमार की अध्यक्षता में नए वर्ष की पहली और कुल दूसरी बैठक में भी प्रस्तावित 29–30 जनवरी को शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) के आयोजन या स्थगन को लेकर कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया जा सका। मंगलवार को हुई बैठक से अभ्यर्थियों को बड़ी उम्मीदें थीं, लेकिन उन्हें एक बार फिर निराशा हाथ लगी।
आयोग ने भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी और तकनीकी रूप से सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से विभिन्न चरणों के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तैयार करने पर जोर दिया है। साथ ही, अलग-अलग परीक्षा एजेंसियों के साथ पूर्व में किए गए समझौता पत्रों (एमओयू) के परीक्षण का निर्णय लिया गया है। आयोग ने परीक्षा नियंत्रक को निर्देश दिए हैं कि वे आगामी बैठक में एसओपी प्रस्तुत करें, जिसके बाद ही परीक्षा तिथियों को अंतिम रूप दिया जाएगा। इसी कारण तय तिथि पर टीईटी का आयोजन संभव नहीं हो पाया।
इसके अलावा, भविष्य में किसी भी प्रकार की तकनीकी या प्रशासनिक विसंगति से बचने के लिए पुराने एमओयू की गहन समीक्षा का फैसला भी परीक्षाओं में देरी का कारण बन रहा है। टीईटी के लिए अभी तक आवेदन प्रक्रिया शुरू नहीं हुई है। जिस पोर्टल के माध्यम से आवेदन लिए जाने हैं, वह भी फिलहाल तैयार नहीं है। पोर्टल निर्माण, विज्ञापन जारी करने, आवेदन आमंत्रण, परीक्षा एजेंसी चयन, प्रश्नपत्र मॉडरेशन और परीक्षा केंद्र निर्धारण जैसी प्रक्रियाओं को देखते हुए माना जा रहा है कि अगली बैठक में टीईटी के स्थगन पर औपचारिक निर्णय लिया जा सकता है।
इसी क्रम में वर्ष 2022 की लंबित प्रशिक्षित स्नातक शिक्षक (टीजीटी) और प्रवक्ता संवर्ग (पीजीटी) भर्ती परीक्षाओं के आयोजन में भी और विलंब होना लगभग तय माना जा रहा है। अभ्यर्थी आयोग की अगली बैठक पर अब टकटकी लगाए हुए हैं।

▼यहाँ पर आप हमें टिप्पणी/कमेन्ट कर सकते हैं। ▼