लखनऊ। केंद्र सरकार द्वारा एक सितंबर 2025 के टीईटी प्रकरण में सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के बाद राज्यों से प्रभावित शिक्षकों का विवरण मांगे जाने से प्रदेश में लगभग दो लाख शिक्षकों में राहत की उम्मीद जगी है। शिक्षकों को भरोसा है कि केंद्र सरकार इस मामले में शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेगी।
शिक्षक संगठनों का कहना है कि केंद्र सरकार के इस कदम से संकेत मिलते हैं कि प्रभावित शिक्षकों को जल्द राहत मिल सकती है। इस मुद्दे पर केंद्र पर निर्णय लेने का दबाव भी बढ़ेगा।
टीईटी से जुड़े इस प्रकरण में कई राज्यों के शिक्षक संगठनों ने एकजुट होकर शिक्षक फेडरेशन ऑफ इंडिया (टीएफआई) के माध्यम से अपनी मांगें रखी हैं। टीएफआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. दिनेश चंद्र शर्मा ने बताया कि विभिन्न राज्यों के शिक्षक इस विषय में एकमत हैं और प्रभावित शिक्षकों को न्याय दिलाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
शिक्षक संगठनों ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से मुलाकात कर देशभर के प्रभावित शिक्षकों को राहत देने की मांग उठाई है। साथ ही अन्य सांसदों को भी इस मुद्दे से अवगत कराया गया है।
उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ (तिवारी गुट) के प्रदेश अध्यक्ष विनय तिवारी और महामंत्री उमाशंकर सिंह ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा राज्यों से जानकारी मांगे जाने से शिक्षकों में राहत की आशा और मजबूत हुई है। उन्होंने बताया कि इस फैसले के विरोध में अखिल भारतीय शिक्षक संघर्ष मोर्चा के आह्वान पर 24 नवंबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर धरना-प्रदर्शन किया गया था। प्रदेश स्तर पर भी इस संबंध में ज्ञापन सौंपा गया था।

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