हैलट के फिजियोथैरेपी विभाग की फिजियोथैरेपिस्ट डॉ. भावना सिंह ने बताया कि भारी बैग के अलावा स्कूल में घंटों एक ही मुद्रा में बैठना, कोचिंग और घर पर पढ़ाई के दौरान गलत बैठने की पोजीशन, और मोबाइल का अधिक उपयोग, बच्चों की रीढ़ पर नकारात्मक असर डालते हैं। उन्होंने सलाह दी कि बच्चे हर दो घंटे में ब्रेक लें, स्ट्रेचिंग करें और सही मुद्रा में बैठने की आदत डालें।
फिजियोथैरेपिस्ट डॉ. उमेश मिश्रा ने कहा कि हाल के वर्षों में बच्चों में काइफोसिस के मामले तेजी से बढ़े हैं। लंबे समय तक मोबाइल और कंप्यूटर पर झुककर बैठने से पीठ की मांसपेशियों पर दबाव पड़ता है, जिससे रीढ़ की हड्डी प्रभावित होती है। उन्होंने अभिभावकों से बच्चों को नियमित व्यायाम, खेल-कूद और कैल्शियम व विटामिन-डी युक्त आहार देने की सलाह दी।
कानपुर फिजियोथैरेपी एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. अमित मिश्रा के अनुसार, निजी अस्पतालों और क्लीनिकों में भी ऐसे मामले लगातार सामने आ रहे हैं, जिनमें बच्चों की रीढ़ में कूबड़ जैसी स्थिति विकसित हो रही है।

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