इज़राइल-ईरान तनाव का असर: क्या भारत में पेट्रोल-डीजल हो सकते हैं महंगे? जानिए पूरी स्थिति
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव ने वैश्विक बाजारों में चिंता बढ़ा दी है। इज़राइल और ईरान के बीच बढ़ती टकराव की स्थिति का असर अब कच्चे तेल की कीमतों पर भी दिखाई देने लगा है। चूंकि भारत अपनी जरूरत का लगभग 80% से अधिक कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है, इसलिए लोगों के मन में यह सवाल उठ रहा है कि क्या आने वाले समय में पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ सकती हैं।
कच्चे तेल के बाजार में क्यों बढ़ी हलचल?
जैसे ही इज़राइल और ईरान के बीच तनाव बढ़ा, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखने को मिली। ब्रेंट क्रूड की कीमतों में कुछ ही दिनों में लगभग 9% तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई। जो कीमत पहले करीब 65 डॉलर प्रति बैरल थी, वह बढ़कर लगभग 72-73 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह तनाव और बढ़ता है या तेल सप्लाई के महत्वपूर्ण रास्तों पर असर पड़ता है, तो कीमतों में और तेजी आ सकती है। खास तौर पर ‘हॉर्मुज जलडमरूमध्य’ जैसे अहम मार्ग पर अगर कोई बाधा आती है तो कच्चा तेल 100 डॉलर प्रति बैरल तक भी पहुंच सकता है।
भारत के लिए रूस से तेल कितना महत्वपूर्ण?
यूक्रेन युद्ध के बाद भारत ने रूस से बड़ी मात्रा में रियायती दरों पर कच्चा तेल खरीदा है। इससे भारत को काफी राहत मिली थी। लेकिन यदि मिडिल ईस्ट में संकट गहराता है और सप्लाई प्रभावित होती है, तो वैश्विक बाजार में तेल की मांग बढ़ सकती है।
ऐसी स्थिति में रूस भी अपने तेल की कीमत बढ़ा सकता है। अगर ऐसा होता है तो भारत को मिलने वाला सस्ता तेल कम हो सकता है, जिससे सरकारी तेल कंपनियों के खर्च में बढ़ोतरी हो सकती है।
क्या वास्तव में पेट्रोल-डीजल महंगे हो सकते हैं?
भारत में फिलहाल पेट्रोल और डीजल की कीमतें काफी समय से स्थिर बनी हुई हैं। लेकिन यदि कच्चा तेल लंबे समय तक महंगा बना रहता है तो इसका असर घरेलू कीमतों पर भी पड़ सकता है।
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आयात खर्च बढ़ेगा: यदि कच्चे तेल की कीमत 80 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर जाती है तो भारत का आयात बिल बढ़ सकता है।
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रुपये पर दबाव: ज्यादा आयात खर्च से रुपये की कीमत पर भी असर पड़ सकता है।
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महंगाई बढ़ने की संभावना: पेट्रोल और डीजल महंगे होने से परिवहन लागत बढ़ती है, जिससे फल-सब्जियों और रोजमर्रा के सामान की कीमतों में भी वृद्धि हो सकती है।
भारत के पास कितना तेल भंडार है?
हालांकि घबराने की जरूरत फिलहाल कम है क्योंकि भारत के पास आपातकालीन स्थिति के लिए तेल का भंडार मौजूद है। देश ने ‘स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व’ के तहत जमीन के नीचे बड़े भंडारण टैंक बनाए हैं, जहां कच्चा तेल सुरक्षित रखा जाता है।
मौजूदा क्षमता के अनुसार भारत के पास लगभग 9.5 दिनों का रणनीतिक कच्चा तेल भंडार है। इसके अलावा देश की रिफाइनरियों के पास भी लगभग 60 से 65 दिनों का अतिरिक्त स्टॉक रहता है। यानी जरूरत पड़ने पर भारत लगभग दो महीने से अधिक समय तक अपनी जरूरतें पूरी कर सकता है।
आगे क्या हो सकता है?
फिलहाल सरकार और तेल कंपनियां अंतरराष्ट्रीय बाजार पर नजर बनाए हुए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक कच्चे तेल की कीमतें 80-85 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रहती हैं, तब तक पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बड़ा बदलाव होने की संभावना कम है।
लेकिन अगर इज़राइल और ईरान के बीच तनाव लंबे समय तक जारी रहता है या युद्ध की स्थिति गंभीर हो जाती है, तो इसका असर वैश्विक तेल बाजार पर पड़ सकता है और आम लोगों की जेब पर बोझ बढ़ने की संभावना भी बन सकती है।

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