लखनऊ। प्रदेश में निःशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा अधिकार अधिनियम (आरटीई) के अंतर्गत इस वर्ष प्रवेश प्रक्रिया में महत्वपूर्ण बदलाव किया गया है। अब अनाथ बच्चों को भी आरटीई के तहत निजी विद्यालयों में प्रवेश का लाभ दिया जाएगा। शासन द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार अनाथ आश्रम में रहने वाले बच्चों के लिए आश्रम प्रबंधक अथवा सक्षम अभिभावक का आधार कार्ड मान्य होगा।
शासन ने स्पष्ट किया है कि बाल गृह या अनाथ आश्रम में निवासरत बच्चों को भी पात्र माना जाएगा। प्रवेश के लिए यह आवश्यक होगा कि बच्चा कमजोर या वंचित वर्ग से संबंधित हो। इसमें अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, सामाजिक व शैक्षिक रूप से पिछड़ा वर्ग, दिव्यांग बच्चे शामिल हैं।
इसके अतिरिक्त एचआईवी या कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों से पीड़ित माता-पिता के बच्चे तथा ऐसे बच्चे जिनके अभिभावक नहीं हैं, उन्हें भी आरटीई के तहत प्रवेश का अवसर मिलेगा। प्रवेश प्रक्रिया के दौरान संबंधित बाल गृह या अनाथ आश्रम के प्रमुख का आधार कार्ड भी मान्य दस्तावेज के रूप में स्वीकार किया जाएगा।
अधिकारियों के अनुसार सत्र 2026-27 के लिए प्रवेश संबंधी सभी आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं। आरटीई की ऑनलाइन प्रक्रिया एनआईसी द्वारा पूरी की जा रही है और शीघ्र ही विस्तृत प्रवेश कार्यक्रम जारी किया जाएगा।
बताया गया कि प्रदेश में आरटीई के अंतर्गत पंजीकृत निजी विद्यालयों की संख्या बढ़कर लगभग 68 हजार हो गई है, जिससे बच्चों के लिए स्कूलों के विकल्प पहले की तुलना में काफी बढ़ गए हैं। इससे जरूरतमंद और वंचित वर्ग के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के बेहतर अवसर मिल सकेंगे।

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