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वार्षिकोत्सव को 1200 और खेल महोत्सव को 300 रुपये, शिक्षकों ने जताई नाराजगी

वार्षिकोत्सव को 1200 और खेल महोत्सव को 300 रुपये, शिक्षकों ने जताई नाराजगी


संतकबीरनगर। परिषदीय विद्यालयों में खेल महोत्सव और वार्षिकोत्सव के आयोजन के लिए क्रमशः 300 रुपये और 1200 रुपये की धनराशि आवंटित की गई है। निदेशक, राज्य परियोजना की ओर से सभी जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों को निर्धारित समयसीमा के भीतर कार्यक्रम आयोजित कराने के निर्देश दिए गए हैं। हालांकि, इतनी कम राशि को लेकर शिक्षक संगठनों ने असंतोष जताया है और इसे अपर्याप्त बताया है।

जिले के 1247 परिषदीय विद्यालयों और सात कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालयों के लिए यह बजट जारी किया गया है। परिषदीय विद्यालयों को वार्षिकोत्सव आयोजन हेतु प्रति विद्यालय 1200 रुपये तथा खेल महोत्सव के लिए कम्युनिटी मोबलाइजेशन मद से 300 रुपये खर्च करने का प्रावधान किया गया है। यही व्यवस्था कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालयों में भी लागू होगी।

खेल महोत्सव के अंतर्गत खेल सामग्री की व्यवस्था, दौड़ प्रतियोगिताओं के लिए ट्रैक निर्माण तथा विजेता विद्यार्थियों को पुरस्कार दिए जाएंगे। प्रत्येक कक्षा के लिए प्रथम, द्वितीय और तृतीय पुरस्कार देने का भी प्रावधान है। वहीं वार्षिकोत्सव में विद्यालय की साज-सज्जा, टेंट, कुर्सी, दरी, पुरस्कार वितरण और अभिभावकों के जलपान की व्यवस्था एसएमसी ट्रेनिंग मद से की जाएगी। सभी विद्यालयों में यह आयोजन 31 जनवरी तक पूरा करना अनिवार्य किया गया है।

प्रस्तावित खेलकूद गतिविधियां
कक्षा तीन से पांच तक के विद्यार्थियों के लिए 50 व 100 मीटर दौड़।
कक्षा पांच से आठ तक के विद्यार्थियों के लिए 100 व 200 मीटर दौड़।
सभी विद्यार्थियों की सहभागिता के लिए रिले रेस।
शिक्षक संगठनों का कहना है कि वर्तमान समय में खेल सामग्री, पुरस्कार, प्रमाणपत्र, मंच सज्जा और सांस्कृतिक कार्यक्रमों पर होने वाला खर्च लगातार बढ़ रहा है। राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के जिलाध्यक्ष नवीन त्रिपाठी ने कहा कि इतनी कम धनराशि में आयोजन केवल औपचारिकता बनकर रह जाएगा।

प्राथमिक शिक्षक संघ की जिलाध्यक्ष अंबिका देवी यादव ने बताया कि 300 रुपये में न तो समुचित खेल सामग्री खरीदी जा सकती है और न ही प्रतियोगिताओं का प्रभावी आयोजन संभव है। वहीं कोषाध्यक्ष केसी सिंह ने भी वार्षिकोत्सव के लिए 1200 रुपये को अपर्याप्त बताते हुए धनराशि में शीघ्र वृद्धि की मांग की है, ताकि विद्यालयों में इन गतिविधियों का आयोजन गरिमा और उद्देश्य के अनुरूप किया जा सके।

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