पता चला है कि मृतक बच्चे नामांकित तो सरकारी प्राथमिक विद्यालय में थे, लेकिन वे पढ़ाई के लिए प्राइवेट स्कूल जा रहे थे। इस अनियमितता की जांच के बाद संबंधित प्राइवेट स्कूल पर पहले ही कार्रवाई हो चुकी है।
खंड शिक्षा अधिकारी ज्योति प्रकाश तिवारी ने बताया कि बच्चों का नाम प्राथमिक विद्यालय में दर्ज था, लेकिन वे पढ़ने दूसरे निजी स्कूल जाते थे। उन्होंने पूरे मामले की रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को सौंप दी है और आगे की कार्रवाई की जा रही है।
इस घटना से यह भी उजागर हुआ है कि मिड-डे मील योजना के तहत बच्चों का नाम सरकारी स्कूल में दर्ज करवाकर उन्हें निजी स्कूल भेजा जा रहा था। इससे मिड-डे मील योजना में संभावित गड़बड़ी की भी आशंका जताई जा रही है।
👉 शिक्षा विभाग अब पूरे मामले की गहराई से जांच कर रहा है। सवाल उठ रहे हैं कि बच्चों के सरकारी स्कूल में पंजीकृत होने के बावजूद वे प्राइवेट स्कूल क्यों जा रहे थे, और इससे मिड-डे मील जैसी योजनाओं में कैसे गड़बड़ी की जा सकती है।

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